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भारत में स्नातक बेरोजगारी: 6.3 करोड़ युवाओं में से 1.1 करोड़ नौकरी के इंतजार में

देश में 20 से 29 वर्ष के लगभग 6.3 करोड़ स्नातकों में से 1.1 करोड़ बेरोजगार हैं। अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय (Azim Premji University) की रिपोर्ट ‘भारत में कामकाज की स्थिति-2026’ के अनुसार, बेरोजगार स्नातकों में से केवल सात फीसदी को पंजीकरण के एक साल के भीतर स्थायी वेतन वाली नौकरी मिल पाती है। 15 से 25 साल के स्नातकों में बेरोजगारी दर करीब 40 फीसदी है, जबकि 25 से 29 वर्ष की आयु वर्ग में यह 20 फीसदी है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि स्नातक युवाओं की शुरुआती कमाई गैर-स्नातकों के मुकाबले लगभग दोगुनी होती है, लेकिन 2011 के बाद पुरुष स्नातकों के वेतन में वृद्धि धीमी रही है। उच्च शिक्षा में नामांकन दर पिछले चार दशकों में 28 फीसदी तक पहुंच गई है, खासतौर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। वहीं, पुरुषों का नामांकन 2017 के 38 फीसदी से घटकर 2024 में 34 फीसदी हो गया, क्योंकि कई पुरुष परिवार की जरूरतों के चलते जल्दी कमाने की ओर जाते हैं।

गरीब परिवारों की उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़कर 2007 के 8 फीसदी से 2017 में 15 फीसदी हो गई है, लेकिन महंगे पेशेवर पाठ्यक्रमों में संपन्न वर्ग की बढ़त जारी है। 2010 के बाद औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) की संख्या में करीब 300 फीसदी की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि युवा तेजी से कृषि क्षेत्र से सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं, हालांकि निजी संस्थानों में गुणवत्ता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। इस अध्ययन से शिक्षा से रोजगार तक युवा यात्रा की चुनौतियों और उसमें आए बदलाव स्पष्ट रूप से दिखते हैं।