देशभर में लापता बच्चों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बनती जा रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की “मिसिंग चिल्ड्रन” रिपोर्ट के अनुसार, 1 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच देश में कुल 33,577 बच्चे लापता हुए। हालांकि इनमें से कई बच्चों को खोज लिया गया है, लेकिन अभी भी 7,777 बच्चों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। यह आंकड़े बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल में लापता बच्चों के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। इस अवधि में राज्य से 19,145 बच्चे गायब हुए, जिनमें से 15,465 बच्चों को ढूंढ लिया गया, जबकि 3,680 बच्चे अब भी लापता हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर है, जहां 4,256 बच्चे लापता हुए और इनमें से 1,059 का अब तक पता नहीं चल सका है। वहीं हरियाणा लापता बच्चों के मामलों में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। यहां 2,209 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 353 बच्चे अभी तक नहीं मिले हैं। हरियाणा में यह संख्या पंजाब, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ की तुलना में कहीं अधिक है।
इन मामलों के बीच कई परिवार अपने बच्चों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं। अंबाला की एक 14 वर्षीय लड़की सहेली के घर जाने की बात कहकर निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। वहीं अंबाला कैंट में एक अन्य किशोरी घर से नाराज होकर चली गई और अब तक लापता है। बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस समस्या से निपटने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था, पुलिस की त्वरित कार्रवाई और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि वे किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें, ताकि लापता बच्चों को जल्द खोजकर उनके परिवारों से मिलाया जा सके।









