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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: OBC नॉन-क्रीमी लेयर का लाभ 8 लाख से अधिक आय वालों को नहीं मिलेगा

सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर (NCL) से जुड़े मामलों में अहम फैसला सुनाया है। देश के शीर्ष न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जिन परिवारों की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें OBC नॉन-क्रीमी लेयर का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि, यदि माता-पिता सरकारी नौकरी में Group IV के पद पर हैं, तो उनकी आय को क्रीमी लेयर में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, कृषि से होने वाली आय को कुल परिवारिक आय में नहीं जोड़ा जाएगा। केवल अन्य स्रोतों जैसे व्यवसाय, संपत्ति आदि से पिछले तीन साल की आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि DoPT द्वारा 2004 में जारी पत्र का पैरा 9 अब लागू नहीं होगा। बैंक और प्राइवेट नौकरी वालों की सैलरी को अब क्रीमी लेयर में नहीं गिना जाएगा। ऐसे मामलों में सरकारी Group III और IV पदों के समानक (equivalence) तय किए जाएंगे। यह फैसला पिछली अवधि (retrospectively) सभी प्रभावित कर्मचारियों पर लागू होगा। DoPT को इसे लागू करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पद भी बनाए जाएंगे, ताकि अन्य कर्मचारियों की सीनियरिटी प्रभावित न हो।

भविष्य में सिविल सर्विस परीक्षा में वैध OBC-NCL सर्टिफिकेट (DM/तहसीलदार से) को प्राथमिकता दी जाएगी और सैलरी आधारित रिजेक्शन बंद किया जाएगा। इससे OBC आरक्षण का मूल उद्देश्य बहाल होगा। देश में OBC वर्ग के लिए कुल 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, जिसमें नॉन-क्रीमी लेयर के अभ्यर्थियों को ही लाभ मिलता है। नए सुप्रीम कोर्ट फैसले से कई ऐसे उम्मीदवारों को फायदा मिलेगा जिन्हें पहले गलत परिभाषा के कारण आरक्षण से बाहर रखा गया था।