अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को दावा किया कि ईरान की नौसैनिक क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचाया गया है और उसके 30 से अधिक युद्धक जहाजों को नष्ट कर दिया गया है। यह जानकारी अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने दी। उन्होंने कहा कि संघर्ष की शुरुआत से अब तक ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में करीब 90 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह तनाव उस समय और बढ़ गया था जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद क्षेत्र में हालात तेजी से बिगड़ गए और संघर्ष पूरे मध्य पूर्व में फैल गया।
एडमिरल कूपर के मुताबिक अमेरिकी नौसेना ने ईरान के कई बड़े युद्धपोतों के साथ-साथ छोटे लड़ाकू जहाजों और ड्रोन से संचालित नौकाओं को भी निशाना बनाया है। हाल ही में एक ईरानी ड्रोन जहाज को भी नष्ट कर दिया गया। उनका कहना है कि इन हमलों से ईरान की समुद्री ताकत को गंभीर झटका लगा है।
अमेरिकी सेना का दावा है कि इन अभियानों का उद्देश्य ईरान के हथियार नेटवर्क और आपूर्ति प्रणाली को बाधित करना था। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के तहत उन जहाजों को निशाना बनाया गया जो हथियारों और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति में इस्तेमाल हो रहे थे।
कूपर ने यह भी कहा कि ईरान के मिसाइल हमलों में आई कमी का कारण उसके सैन्य ठिकानों और आपूर्ति मार्गों पर लगातार हमले हैं। समुद्री रास्तों पर नियंत्रण के कारण नई मिसाइलों और हथियारों की आपूर्ति भी काफी कठिन हो गई है। उनके अनुसार यह अभियान ईरान के मिसाइल और परमाणु खतरे को कम करने के उद्देश्य से जारी है।









