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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत को बड़ी राहत, रूस ने किया बड़ा ऐलान

मध्य पूर्व में हालिया घटनाक्रम ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल पैदा कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने तेल आयात करने वाले देशों की चिंता बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग विश्व के ऊर्जा व्यापार का प्रमुख केंद्र है और यहां किसी भी प्रकार की रुकावट से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है।

तनाव के बीच रूस ने एशियाई देशों को भरोसा दिलाया है कि आवश्यकता पड़ने पर वह आपूर्ति बढ़ाने पर विचार करेगा। रूस के उप प्रधानमंत्री Alexander Novak ने संकेत दिया है कि बदलते हालात में उत्पादन और निर्यात क्षमता को समायोजित किया जा सकता है, ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे। यह संदेश खास तौर पर भारत और चीन जैसे बड़े उपभोक्ता देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है। देश को खाड़ी क्षेत्र से प्रतिदिन भारी मात्रा में कच्चा तेल प्राप्त होता है। अगर समुद्री मार्ग में व्यवधान आता है, तो रिफाइनरियों पर दबाव बढ़ सकता है और घरेलू बाजार में ईंधन कीमतों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में रूस की ओर से अतिरिक्त आपूर्ति की संभावना एक सुरक्षा कवच की तरह देखी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पहले से ही अपने स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति अपना रहा है। मौजूदा परिस्थिति में रूस की तत्परता ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित रखने में सहायक हो सकती है और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत को राहत दे सकती है।