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देश की पहली कृषि कैबिनेट में किसानों के लिए ₹27,746 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी, 5 साल में होंगे बड़े बदलाव

मध्यप्रदेश में किसान कल्याण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए देश की पहली कृषि कैबिनेट का आयोजन किया गया। Mohan Yadav की अध्यक्षता में बड़वानी जिले के नांगलवाड़ी में आयोजित इस बैठक में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी और सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी कई योजनाओं को मंजूरी दी गई। इस बैठक में कुल मिलाकर लगभग ₹27,746 करोड़ की योजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिन्हें अगले पांच वर्षों में लागू किया जाएगा।

कृषि कैबिनेट में नई नीतियों और विकास परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया गया। सरकार ने मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्य पालन नीति 2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत अगले तीन वर्षों में करीब ₹3000 करोड़ निवेश और लगभग 20,000 रोजगार सृजित होने की संभावना है। कृषि क्षेत्र में नवाचार, इको-टूरिज्म और ग्रीन एनर्जी आधारित आजीविका मॉडल विकसित करने की योजना है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अगले पांच वर्षों तक ₹610.51 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत उन्नत नस्ल के पशुओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए ₹656 करोड़ की स्वीकृति दी गई। पशुधन और कुक्कुट उत्पादन बढ़ाने के लिए कमजोर वर्ग के पशुपालकों को सहायता देने वाली योजनाओं पर भी ₹1723 करोड़ खर्च किए जाएंगे।

उद्यानिकी क्षेत्र में किसानों को उच्च गुणवत्ता के बीज और पौधे रियायती दरों पर उपलब्ध कराने के लिए ₹1738.94 करोड़ की स्वीकृति दी गई। वहीं सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ₹1375 करोड़ की योजना को मंजूरी दी गई, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सहकारिता क्षेत्र में किसानों को वित्तीय सहायता देने के लिए कई योजनाओं को विस्तार दिया गया। सहकारी बैंकों के माध्यम से फसल ऋण उपलब्ध कराने के लिए ₹1975 करोड़ और अल्पकालीन कृषि ऋण पर शून्य प्रतिशत ब्याज योजना के लिए ₹3909 करोड़ की स्वीकृति दी गई।

इसके अलावा, नर्मदा नियंत्रण मंडल की बैठक में बड़वानी जिले में दो सिंचाई परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई। वरला और पानसेमल क्षेत्रों में माइक्रो सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से हजारों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इन परियोजनाओं पर कुल ₹2067.97 करोड़ खर्च किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना है। भविष्य में भी किसान कल्याण के लिए इस तरह की कृषि कैबिनेट बैठकों का आयोजन किया जाएगा।