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मिडिल ईस्ट तनाव का भारत के ऑटो निर्यात पर रहेगा सीमित असर

अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से वैश्विक व्यापार पर असर की आशंका जताई जा रही है। हालांकि भारत की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी Maruti Suzuki India Limited ने स्पष्ट किया है कि उसके कुल निर्यात में मध्य पूर्व की हिस्सेदारी केवल लगभग 12.5 प्रतिशत है, जिससे कंपनी पर सीधा प्रभाव सीमित रहने की संभावना है। कंपनी के कॉरपोरेट अफेयर्स के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी राहुल भारती के अनुसार, भारत से होने वाला ऑटो निर्यात विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित रूप से फैला हुआ है। कंपनी करीब 100 देशों में वाहन निर्यात करती है, जिनमें लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व शामिल हैं। इस विविध बाजार रणनीति के कारण किसी एक क्षेत्र में तनाव का जोखिम कम हो जाता है।

अप्रैल से फरवरी FY26 के दौरान मारुति सुजुकी का निर्यात साल-दर-साल 33.75 प्रतिशत बढ़कर 4,00,734 यूनिट तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 2,99,617 यूनिट था। कंपनी ने FY26 के लिए 4 लाख यूनिट निर्यात का लक्ष्य पहले 11 महीनों में ही हासिल कर लिया है। कंपनी की पहली इलेक्ट्रिक कार Maruti Suzuki e Vitara का भी तेजी से विस्तार हो रहा है। यह मॉडल अब 39 देशों में निर्यात किया जा रहा है, जिनमें ब्रिटेन, नॉर्वे, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड प्रमुख बाजार हैं।

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया भारतीय यात्री वाहन निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण बाजार जरूर है, लेकिन इस क्षेत्र में आमतौर पर Hyundai Motor India Limited और Nissan Motor India Private Limited जैसी कंपनियों के निर्यात में भी हिस्सेदारी 10 से 15 प्रतिशत के आसपास ही रहती है। लंबे समय तक भू-राजनीतिक तनाव रहने पर शिपिंग लागत, बीमा खर्च, तेल की कीमतों और वाहन मांग पर असर पड़ सकता है, लेकिन फिलहाल भारतीय ऑटो निर्यात क्षेत्र की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।