कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney इस सप्ताह अपने पहले आधिकारिक भारत दौरे पर हैं। इसे भारत-कनाडा संबंधों को पटरी पर लाने का अहम अवसर माना जा रहा है। बीते 10 महीनों में उनकी Narendra Modi से यह तीसरी मुलाकात है, जो दोनों देशों की ओर से रिश्तों को सामान्य करने की गंभीर कोशिश को दर्शाती है।
2023-24 के दौरान खालिस्तानी उग्रवाद और कूटनीतिक विवादों के चलते संबंधों में तीखा तनाव आया था। राजनयिक निष्कासन, आरोप-प्रत्यारोप और व्यापारिक असर ने भरोसे को कमजोर किया। हालांकि 2025 से संवाद की प्रक्रिया फिर शुरू हुई। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval की अगुवाई में हुई सुरक्षा वार्ताओं ने मतभेदों को संस्थागत ढांचे में लाने और टकराव के बजाय सहयोग पर ध्यान केंद्रित करने का रास्ता बनाया।
दौरे का प्रमुख एजेंडा कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) को आगे बढ़ाना है, जिसका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। कनाडाई पेंशन फंड पहले ही भारत के बुनियादी ढांचे में भारी निवेश कर चुके हैं, और नए समझौते से इसमें और वृद्धि की उम्मीद है। ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, डिजिटल सेवाएं और क्रिटिकल मिनरल्स प्रमुख क्षेत्र होंगे। यूरेनियम आपूर्ति, परमाणु सहयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा तकनीक में साझेदारी पर भी चर्चा संभव है। वैश्विक अनिश्चितता के दौर में दोनों देश व्यापार विविधीकरण और नई रणनीतिक साझेदारियों पर जोर दे रहे हैं।









