Punjab

स्कूल–कॉलेजों में अवैध “प्रधानी” पर हाईकोर्ट सख्त, पंजाब सरकार को 2 महीने की मोहलत

Punjab and Haryana High Court ने पंजाब के शैक्षणिक संस्थानों में कथित रूप से पनप रही अवैध “प्रधानी” संस्कृति पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस मुद्दे पर प्रस्तुत शिकायत पर दो महीने के भीतर कानून के अनुरूप स्पष्ट और कारणयुक्त निर्णय ले।

यह मामला एक जनहित याचिका के माध्यम से उठाया गया, जिसे पंजाब यूथ कांग्रेस के सचिव अंगद दत्ता ने दायर किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि राज्य के कई स्कूलों और कॉलेजों में बिना किसी आधिकारिक चुनाव प्रक्रिया या प्रशासनिक स्वीकृति के छात्रों को “प्रधान” या “प्रेसिडेंट” घोषित किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, इस प्रवृत्ति के कारण शिक्षण संस्थानों में गुटबाजी बढ़ रही है और छात्र आपसी टकराव की ओर अग्रसर हो रहे हैं। यह भी कहा गया कि कई मामलों में नाबालिग विद्यार्थियों को शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक गतिविधियों में शामिल किया जा रहा है, जिससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है और अनुशासन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि संबंधित अधिकारियों को विस्तृत शिकायत पहले ही भेजी जा चुकी थी, लेकिन उस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस पर न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देशित किया कि वह निर्धारित अवधि के भीतर शिकायत पर विचार कर “स्पीकिंग ऑर्डर” जारी करे और उसकी प्रति याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराए।

मामले की सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता ने कहा कि शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक प्रभाव और शक्ति प्रदर्शन से दूर रखा जाना चाहिए। अब ध्यान इस बात पर है कि सरकार अदालत के निर्देशों के तहत क्या कदम उठाती है और क्या शैक्षणिक परिसरों में अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीति बनाई जाती है।