भारतीय सेना की युद्धक क्षमता अब स्वदेशी JM-1 कामिकाज़े ड्रोन से और सशक्त हो गई है। जॉननेट टेक्नोलॉजीज ने सेना को एक हजार से अधिक लॉइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन सौंपे हैं, जिनमें हाल ही में तीसरी खेप भी शामिल हुई। ये ड्रोन 18,000 फीट तक सक्रिय रहकर ऑपरेशन सिंदूर में अपनी सटीकता साबित कर चुके हैं।
JM-1 ड्रोन लक्ष्य के ऊपर मंडराते हुए सही समय पर हमला करते हैं, जिससे दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला संभव होता है। इन ड्रोन की ताकत का प्रदर्शन 77वें गणतंत्र दिवस परेड में भी किया गया था, जहां भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेज ने इन्हें प्रदर्शित किया। इस ड्रोन में 80% से अधिक स्वदेशी पुर्जों का इस्तेमाल किया गया है, जो पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में ऑपरेशन के लिए बेहद उपयुक्त हैं। सेना में इन ड्रोन की तैनाती को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। बदलते सुरक्षा हालात के बीच ये स्वदेशी तकनीक भारतीय सेना को तेज, सटीक और मजबूत जवाब देने में सक्षम बनाएगी।









