भारतीय बैंकिंग सेक्टर आने वाले समय में और अधिक मजबूत होता नजर आ रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने जापान के सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन (SMBC) को भारत में पूरी तरह से स्वामित्व वाली सब्सिडियरी यानी व्हॉली ओन्ड सब्सिडियरी (WOS) स्थापित करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह फैसला विदेशी बैंकों से जुड़े 2025 के नियामकीय ढांचे के तहत लिया गया है, जिसका मकसद भारत में अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग गतिविधियों को अधिक संगठित और जवाबदेह बनाना है।
फिलहाल SMBC भारत में शाखा मॉडल के जरिए काम कर रहा है और नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई तथा बेंगलुरु में इसकी मौजूदगी है। अब बैंक को अपनी मौजूदा शाखाओं को एक स्थानीय सब्सिडियरी में बदलने की अनुमति दी गई है। हालांकि, अंतिम लाइसेंस बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत तब जारी किया जाएगा, जब RBI यह सुनिश्चित कर लेगा कि सभी जरूरी शर्तों और मानकों का पूरी तरह पालन हो चुका है।
WOS के रूप में काम करने से SMBC को भारत में अपने संचालन पर ज्यादा नियंत्रण और लचीलापन मिलेगा। इसके साथ ही बैंक स्थानीय नियमों के तहत एक स्वतंत्र कानूनी इकाई के रूप में काम करेगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत में जापानी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां और तेज होंगी।
इस फैसले का असर सिर्फ बैंकिंग सिस्टम तक सीमित नहीं रहेगा। नई शाखाओं और विस्तारित सेवाओं के साथ रोजगार के नए अवसर बनेंगे, कॉरपोरेट फाइनेंसिंग और ट्रेजरी सेवाएं मजबूत होंगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ने से ग्राहकों को बेहतर बैंकिंग सुविधाएं मिलेंगी। कुल मिलाकर, यह पहल भारतीय वित्तीय क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर और अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।









