आज के समय में क्रेडिट कार्ड सिर्फ भुगतान का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक और आकर्षक ऑफर्स का साधन बन चुका है. इसी लालच में कई लोग ऐसे तरीके अपनाने लगे हैं, जो आगे चलकर टैक्स से जुड़ी बड़ी परेशानी खड़ी कर सकते हैं. इनकम टैक्स विभाग अब डिजिटल खर्चों पर आधुनिक तकनीक के जरिए बारीकी से नजर रख रहा है, जिसमें क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन भी शामिल हैं.
अक्सर देखा गया है कि लोग ज्यादा रिवॉर्ड पाने के लिए दूसरों के खर्च अपने कार्ड से चुकाते हैं और बाद में उनसे पैसा वापस ले लेते हैं. कुछ मामलों में किराया, वॉलेट लोड या पेमेंट ऐप्स के जरिए रकम को इधर-उधर घुमाया जाता है, ताकि खर्च ज्यादा दिखे. टैक्स विभाग ऐसे लेन-देन को वास्तविक खर्च नहीं मानता और इन्हें संदेह की नजर से देखा जा सकता है.
अगर आपकी घोषित आय सीमित है, लेकिन कार्ड स्टेटमेंट में महंगी शॉपिंग, ट्रैवल या लग्जरी खर्च दिखाई देते हैं, तो यह असंतुलन सिस्टम में अलर्ट पैदा कर सकता है. विभाग आपसे इन खर्चों का स्रोत पूछ सकता है. इसी तरह, दोस्तों या रिश्तेदारों को कार्ड इस्तेमाल के लिए देना और बदले में कैश या UPI लेना भी जोखिम भरा साबित हो सकता है, खासकर जब इसका स्पष्ट रिकॉर्ड न हो.
कुछ लोग टैक्स बचाने के लिए क्रेडिट कार्ड से किराया भुगतान कर HRA छूट लेने की कोशिश करते हैं. यदि किराए का संबंध और दस्तावेज सही नहीं हुए, तो यह छूट रद्द हो सकती है. वहीं, रिवॉर्ड पॉइंट्स आमतौर पर टैक्स फ्री होते हैं, लेकिन अगर उन्हें नकद में बदला जाए और उनकी कीमत तय सीमा से ज्यादा हो जाए, तो उसे आय माना जा सकता है.
इसलिए जरूरी है कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल सोच-समझकर करें, हर लेन-देन का पुख्ता रिकॉर्ड रखें और खर्च को अपनी वास्तविक आय के अनुरूप ही रखें. थोड़ी सी सावधानी आपको टैक्स नोटिस जैसी बड़ी परेशानी से बचा सकती है.









