पंजाब सरकार ने जेलों में बंद कैदियों के पुनर्वास की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए अब उन्हें केवल सज़ा काटने के बजाय तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की तैयारी की है। राज्य की एम्पावरिंग लाइव्स बिहाइंड बार्स पहल के तहत 11 जेलों में नए इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट स्थापित किए जा रहे हैं। इन संस्थानों के माध्यम से लगभग 2500 बंदियों को वेल्डिंग, इलेक्ट्रिकल वर्क, बेकरी और कंप्यूटर ऑपरेटर जैसे विभिन्न ट्रेडों में राष्ट्रीय स्तर की स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी।
इस कार्यक्रम की शुरुआत पटियाला सेंट्रल जेल से होगी, जहां भारत के मुख्य न्यायाधीश सुर्या कांत की मौजूदगी में उद्घाटन होगा। प्रशिक्षण में शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों तरह के कोर्स शामिल होंगे, जिन्हें NCVT और NSQF मान्यता प्राप्त होगी। आधुनिक उपकरणों से लैस वर्कशॉप और जेल फैक्ट्रियों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग इसकी विशेषता होगी। प्रशिक्षण लेने वाले प्रत्येक बंदी को प्रतिमाह 1000 रुपये का स्टाइपेंड भी दिया जाएगा, जबकि कोर्स पूरा करने पर मिलने वाले प्रमाणपत्र निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में मान्य होंगे।
पंजाब जेल प्रशासन पहले से ही कई सुधारात्मक कार्यक्रम चला रहा है, जिनमें पेट्रोल पंप संचालन, योग और खेल गतिविधियाँ, परिवार से संपर्क के लिए प्रिजन कॉलिंग सिस्टम, कैदियों का रेडियो चैनल रेडियो उजाला, और कला एवं अभिव्यक्ति के लिए विशेष मंच शामिल हैं। इसी क्रम में पंजाब स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी यूथ अगेंस्ट ड्रग्स नाम से राज्यव्यापी जागरूकता अभियान भी शुरू कर रही है, ताकि नशे से जुड़े अपराधों में कमी लाई जा सके।
पड़ोसी राज्य हरियाणा भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है। वहाँ कंप्यूटर इंजीनियरिंग में तीन वर्षीय पॉलिटेक्निक डिप्लोमा के साथ-साथ विभिन्न ITI और स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किए जा रहे हैं। जस्टिस कुलदीप तिवारी की अध्यक्षता में तैयार मॉडल काउंसलिंग, अनुशासन आधारित प्रमाणन और कैदियों के कौशल को आगे बढ़ाने पर जोर देता है। इन पहलों का उद्देश्य जेलों को केवल दंड स्थल की बजाय सुधार और नए अवसरों का केंद्र बनाना है, ताकि रिहा होने के बाद कैदी समाज में सम्मानजनक जीवन के साथ वापसी कर सकें।









