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डिमर्जर के बाद टाटा मोटर्स पर सेंसेक्स से बाहर होने का संकट, इंडिगो ले सकती है जगह

टाटा मोटर्स एक बार फिर सेंसेक्स से बाहर होने की स्थिति में पहुंच गई है। घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक में लंबे समय से शामिल रही यह कंपनी अब अपनी मार्केट कैपिटलाइजेशन requirement पूरी नहीं कर पा रही है। इसका मुख्य कारण हाल ही में हुआ डिमर्जर है, जिसके बाद टाटा मोटर्स दो स्वतंत्र लिस्टेड कंपनियों में बंट गई। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड (PV) और टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स लिमिटेड (CV)।

पैसेंजर व्हीकल और इलेक्ट्रिक वाहन कारोबार वाली टाटा मोटर्स PV का मौजूदा मार्केट कैप लगभग 1.37 लाख करोड़ रुपये है, जबकि ट्रक और बस सहित कमर्शियल वाहन विभाग संभालने वाली टाटा मोटर्स CV का मार्केट कैप करीब 1.19 लाख करोड़ रुपये है। संयुक्त रूप से यह मूल्य सेंसेक्स में बने रहने के लिए आवश्यक दो लाख करोड़ रुपये की न्यूनतम शर्त को पूरा नहीं करता।

बीएसई दिसंबर माह में सेंसेक्स 30 की वार्षिक समीक्षा करेगा और नई सूची 19 दिसंबर को जारी की जाएगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि टाटा मोटर्स की जगह देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो को शामिल किया जा सकता है, जिसका मार्केट कैप 2.27 लाख करोड़ रुपये है। इसके साथ ही आदित्य बिड़ला ग्रुप की ग्रासिम इंडस्ट्रीज भी सेंसेक्स में स्थान पाने की दावेदार है।

सेंसेक्स की शुरुआत 1 जनवरी 1986 को हुई थी और तब से केवल तीन कंपनियां रिलायंस इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान यूनिलीवर और आईटीसी लगातार इसका हिस्सा बनी हुई हैं। टाटा मोटर्स भी कई बार इंडेक्स में शामिल हुई और बाहर हुई है। यह दिसंबर 2019 में बाहर हुई थी और तीन साल बाद 2022 में दोबारा लौटी थी। अब दिसंबर 2024 की समीक्षा इसका भविष्य तय करेगी।