भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) इस वित्तीय वर्ष में सात और अंतरिक्ष मिशन लॉन्च करने की योजना बना रहा है। ISRO के अध्यक्ष वी नारायणन ने बताया कि इनमें वाणिज्यिक संचार उपग्रह के साथ कई पीएसएलवी और जीएसएलवी मिशन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत में निर्मित पहला पीएसएलवी लॉन्च अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।
ISRO ने चंद्रयान-4 मिशन को भी मंजूरी दे दी है, जिसका लक्ष्य 2028 तक चंद्रमा से नमूने वापस लाना है। वर्तमान में यह उपलब्धि केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास है। इसके अलावा, जापान की JAXA के सहयोग से लूपेक्स मिशन पर भी काम चल रहा है, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ का अध्ययन करेगा।
नारायणन ने बताया कि ISRO अगले तीन वर्षों में अंतरिक्ष यान उत्पादन को तीन गुना बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। संगठन ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भी काम शुरू कर दिया है, जिसका पहला मॉड्यूल 2028 तक कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इस तरह, भारत तीसरे देश के रूप में अंतरिक्ष स्टेशन संचालित करने में शामिल होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने ISRO को निर्देश दिया है कि 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजा जाए और सुरक्षित वापस लाया जाए। ISRO की यह सक्रिय योजना भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र की क्षमता और वैश्विक महत्व को और बढ़ाएगी।









