बिहार विधानसभा चुनाव 2025 ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को 121 सीटों पर होगा, जबकि दूसरे चरण की वोटिंग 11 नवंबर और नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। चुनावी माहौल गर्म है और सभी दल अपने-अपने प्रत्याशियों के प्रचार में जुटे हैं। इस बार जनसुराज पार्टी पहली बार मैदान में उतरी है, लेकिन खास बात यह है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की संख्या में यह पार्टी सबसे आगे निकल गई है।
जानकारी के अनुसार, प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने कुल 114 उम्मीदवारों में से 49 ऐसे प्रत्याशियों को टिकट दिया है, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं — यानी पार्टी के 43% प्रत्याशी क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले हैं। आरजेडी इस मामले में दूसरे स्थान पर है, जहां 70 में से 42 उम्मीदवार (60%) के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज हैं।
वहीं बीजेपी ने 48 में से 27 उम्मीदवार (56%), कांग्रेस ने 23 में से 12 (52%), और जेडीयू ने 57 में से 15 उम्मीदवारों (26%) को टिकट दिया है। इसके अलावा CPI(M) के सभी तीन प्रत्याशी, यानी 100%, आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। CPI(ML) के 14 में से 9 (64%), CPI के 5 में से 4 (80%) और बसपा के 89 में से 16 (18%) उम्मीदवार ऐसे हैं जिन पर आपराधिक आरोप हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि बिहार की राजनीति में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों की हिस्सेदारी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।









