भारत सरकार ने रूस और वेनेजुएला से तेल खरीद को लेकर उठ रही अटकलों पर अपना स्पष्ट रुख पेश किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि देश की 1.4 अरब जनता की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है, और इसी दृष्टिकोण से सभी निर्णय लिए जाते हैं। जायसवाल ने बताया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यावहारिक और संतुलित नीति अपनाता है। इसका मूल आधार “ऊर्जा स्रोतों में विविधता” यानी डाइवर्सिफिकेशन है। इससे किसी एक देश पर निर्भरता कम होती है, आपूर्ति बाधा और कीमतों में अस्थिरता का खतरा सीमित रहता है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपने निर्णय वैश्विक बाजार की परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय माहौल को ध्यान में रखकर करता है। किसी भी देश के साथ ऊर्जा सहयोग को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक जरूरतों के आधार पर देखा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में उद्योग, परिवहन और घरेलू मांग के चलते ऊर्जा की जरूरत लगातार बढ़ रही है। इसलिए तेल आयात से जुड़े फैसले दीर्घकालिक योजना और स्थिर आपूर्ति को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।









