बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग से जुड़ा मजदूर आंदोलन हिंसक रूप लेता जा रहा है। महंगाई और कम वेतन से परेशान हजारों गारमेंट कर्मचारी सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। मजदूरों की मांग है कि उनका न्यूनतम मासिक वेतन 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका किया जाए। उनका कहना है कि भोजन, मकान का किराया, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे कम वेतन में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
31 अक्टूबर से शुरू हुए प्रदर्शनों का असर ढाका के मीरपुर, आशुलिया, सावर और गाजीपुर समेत कई औद्योगिक क्षेत्रों में देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर जाम लगाया और कई जगह आगजनी व तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। विरोध प्रदर्शनों के कारण 529 कपड़ा कारखानों का काम प्रभावित हुआ और करीब 9.87 लाख श्रमिकों पर असर पड़ा। हालांकि, सोमवार को कई फैक्ट्रियां दोबारा खुल गईं।
मजदूरों के आंदोलन के बीच सरकार ने छह सदस्यीय न्यूनतम वेतन बोर्ड का गठन किया है, जो वेतन ढांचे की समीक्षा करेगा। वहीं, गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने आरोप लगाया है कि पूर्व सत्तारूढ़ अवामी लीग से जुड़े कुछ लोग आंदोलन को हिंसक बनाने और औद्योगिक क्षेत्रों में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, मजदूर संगठनों ने वेतन और रोजगार से जुड़ी समस्याओं को आंदोलन की प्रमुख वजह बताया है। बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग देश की अर्थव्यवस्था और निर्यात का बड़ा आधार है। ऐसे में लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों से उत्पादन, निर्यात और अंतरराष्ट्रीय कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।


