पिछले वर्ष 12 जून को हुआ विमान हादसा भारत के विमानन इतिहास के सबसे दुखद अध्यायों में शामिल माना जाता है। इस घटना के बाद न केवल देश में, बल्कि वैश्विक स्तर पर हवाई यात्रा की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे थे। अब अमेरिका के एक विमानन सुरक्षा अभियान समूह ने अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया के बोइंग-787 ड्रीमलाइनर को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। सेफ्टी ग्रुप का दावा है कि यह विमान अपनी पूरी सेवा अवधि के दौरान लगातार तकनीकी समस्याओं से जूझता रहा और इन खामियों को वैश्विक स्तर पर कम करके आंका गया।
फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (FAS) के अनुसार, उन्होंने 12 जनवरी को अमेरिकी सीनेट में इस संबंध में एक प्रेजेंटेशन सौंपी थी। ग्रुप के पास मौजूद रिकॉर्ड बताते हैं कि VT-ANB रजिस्ट्रेशन वाला यह विमान एयर इंडिया की सेवा में शामिल होने के पहले ही दिन तकनीकी फेलियर का शिकार हो गया था। एफएएस का आरोप है कि विमान में इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, क्वालिटी कंट्रोल और मेंटेनेंस से जुड़ी गंभीर कमियां थीं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक और सॉफ्टवेयर फॉल्ट, बार-बार सर्किट ब्रेकर का ट्रिप होना, वायरिंग डैमेज, शॉर्ट सर्किट, पावर सप्लाई की समस्या और सिस्टम का अत्यधिक गर्म होना शामिल है।
बोइंग ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के प्रोटोकॉल के तहत एएआईबी की जांच पर भरोसा करेगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयर इंडिया ने फिलहाल इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। एफएएस ने शुरुआती जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि अक्सर जांच में पायलट की गलती को प्रमुख कारण बताया जाता है, जैसा कि पहले 737 मैक्स हादसों में देखा गया था।









