सुप्रीम कोर्ट से 2014 में सेवानिवृत्त होने के बावजूद न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई आज भी देश के कई महत्वपूर्ण निर्णयों के केंद्र में हैं. 76 वर्षीय न्यायमूर्ति देसाई वर्तमान में आठवें वेतन आयोग की अध्यक्ष हैं, जिन्हें केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन में संशोधन की सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय मिला है. उनके साथ आईआईएम बैंगलोर के प्रोफेसर पुलक घोष और पेट्रोलियम सचिव पंकज जैन सदस्य हैं. न्यायमूर्ति देसाई ने अपने करियर में कई अहम भूमिकाएँ निभाई हैं. वह 26/11 हमले के आरोपी अजमल कसाब को दी गई फांसी की सजा को बरकरार रखने वाली पीठ का हिस्सा थीं और सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में भी न्यायिक हस्तक्षेप के लिए जानी गईं.
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण और अग्रिम निर्णय प्राधिकरण (आयकर) की अध्यक्षता की. 2018 में उन्हें लोकपाल खोज समिति का नेतृत्व सौंपा गया. 2020 में केंद्र सरकार ने उन्हें जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग का प्रमुख बनाया, जिसकी रिपोर्ट पर वहां विधानसभा चुनाव हुए. बाद में उन्होंने उत्तराखंड और गुजरात की समान नागरिक संहिता (UCC) समितियों का नेतृत्व किया और भारतीय प्रेस परिषद की अध्यक्ष भी बनीं. न्यायमूर्ति देसाई का करियर सार्वजनिक सेवा, पारदर्शिता और न्यायिक ईमानदारी का प्रतीक माना जाता है—वह आज भी अपने अनुभव और नेतृत्व से कई अहम नीतिगत निर्णयों को दिशा दे रही हैं.









