सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कई अहम टिप्पणियां कीं। तीन जजों की पीठ – न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारी- ने कहा कि किसी भी जानवर के व्यवहार का पहले से अनुमान लगाना संभव नहीं है कि वह कब आक्रामक हो जाए। अदालत ने साफ कहा कि सड़कें, स्कूल और सार्वजनिक संस्थान आवारा कुत्तों से मुक्त होने चाहिए, क्योंकि ये केवल काटने का खतरा ही नहीं बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकते हैं।
पीठ ने कहा कि इलाज से बेहतर रोकथाम है और सड़कों को सुरक्षित रखना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि आक्रामक कुत्तों को पकड़कर नसबंदी कराई जाती है और फिर उन्हें उसी इलाके में छोड़ा जाता है। इस पर कोर्ट ने व्यंग्य करते हुए कहा कि सबसे बड़ी कमी यह है कि कुत्तों को यह समझाने का कोई तरीका नहीं है कि वे दोबारा काटें नहीं। अदालत ने दोहराया कि कुत्तों का सड़कों पर दौड़ना भी जानलेवा साबित हो सकता है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट सार्वजनिक स्थानों और संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाकर उन्हें आश्रय स्थलों में भेजने के आदेश भी दे चुका है।









