सूरत की निजी कंपनी भारत स्पेस व्हीकल, जिसे अनुभवी इसरो वैज्ञानिकों ने स्थापित किया है, एक नया तरल ईंधन आधारित रॉकेट विकसित कर रही है, जो 500 किलोग्राम तक के उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेज सकेगा। कंपनी का यह दो-चरणों वाला रॉकेट, अगस्थ्य-1, छोटे उपग्रहों के लिए विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है और इसे ध्रुवीय कक्षा में 500 किलोग्राम तथा कम झुकाव वाली निचली कक्षा में 800 किलोग्राम तक का भार ले जाने में सक्षम माना जा रहा है। तरल ईंधन तकनीक की वजह से रॉकेट का परीक्षण और प्रक्षेपण सुरक्षित व प्रभावी होगा, जिससे सफलता की संभावना बढ़ती है।
कंपनी की टीम में ऐसे विशेषज्ञ शामिल हैं जिन्होंने देश के महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों में योगदान दिया है और तरल प्रणोदन प्रणाली तथा प्रक्षेपण यान तकनीक में दशकों का अनुभव रखते हैं। इसके अलावा, गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के कोडिनार में नए प्रक्षेपण केंद्र की योजना भी प्रस्तावित है, जो भारत के पश्चिमी तट पर अतिरिक्त लॉन्च विकल्प उपलब्ध कराएगा। नई अंतरिक्ष नीति 2023 के तहत निजी कंपनियों के लिए अवसर बढ़ने से भारत स्पेस व्हीकल जैसी पहलें देश को वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने और कम लागत में उपग्रह प्रक्षेपण की दिशा में नई राह खोल सकती हैं।









