West Bengal

सुप्रीम कोर्ट का सख्त फैसला: पश्चिम बंगाल सरकार को कर्मचारियों का लंबित महंगाई भत्ता चुकाने का निर्देश

पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) उनका वैधानिक अधिकार है और इसे रोका नहीं जा सकता। अदालत ने राज्य सरकार को कई वर्षों से लंबित बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे थे।

मामला वर्ष 2009 से लंबित महंगाई भत्ते से जुड़ा है। राज्य सरकार ने आर्थिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए भुगतान में देरी की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया। अदालत ने कहा कि वित्तीय संकट किसी कर्मचारी के अधिकारों को दबाने का आधार नहीं बन सकता। कर्मचारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

भुगतान प्रक्रिया की निगरानी के लिए अदालत ने एक विशेष समिति गठित की है, जिसकी अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश करेंगी। समिति में न्यायपालिका और लेखा विभाग के अनुभवी सदस्य शामिल होंगे, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि आदेश का पालन सही तरीके से हो।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि महंगाई भत्ता स्थिर नहीं, बल्कि बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार समायोजित होने वाला प्रावधान है। राज्य सरकार मनमाने तरीके से इसमें कटौती या देरी नहीं कर सकती। फैसले के बाद कर्मचारियों में उत्साह है, जबकि सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ने की संभावना है। यह निर्णय कर्मचारियों के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।