देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR) व्यवस्था शुरू की है। इस नई प्रणाली के माध्यम से साइबर ठगी का शिकार हुआ कोई भी व्यक्ति देश के किसी भी हिस्से से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकता है और उसकी डिजिटल रसीद भी तुरंत प्राप्त कर सकता है।
पीड़ित राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) या हेल्पलाइन नंबर 1930 के जरिए अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है। यदि साइबर धोखाधड़ी की राशि 10 लाख रुपये या उससे अधिक है, तो शिकायत स्वतः ई-जीरो एफआईआर में परिवर्तित हो जाती है। इस व्यवस्था को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173 के तहत कानूनी मान्यता प्राप्त है और इसे गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने विकसित किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए इस प्रणाली को देशभर में तेजी से लागू करने पर जोर दिया है। ई-जीरो एफआईआर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें क्षेत्राधिकार की बाध्यता नहीं होती। यानी शिकायत किसी भी स्थान से दर्ज की जा सकती है और संबंधित एजेंसी तक स्वतः पहुंच जाती है।
शिकायत दर्ज होते ही उसकी डिजिटल प्रति ईमेल या व्हाट्सएप के माध्यम से शिकायतकर्ता को भेज दी जाती है। इसके बाद मामला सीसीटीएनएस (CCTNS) नेटवर्क के जरिए संबंधित साइबर पुलिस स्टेशन को जांच के लिए स्थानांतरित कर दिया जाता है। हालांकि, शिकायतकर्ता को तीन दिनों के भीतर संबंधित साइबर थाने में जाकर अपने बयान का सत्यापन कराना आवश्यक होता है।
इस व्यवस्था से साइबर अपराध के शुरुआती घंटों में त्वरित कार्रवाई संभव होगी। संदिग्ध बैंक खातों को जल्दी फ्रीज किया जा सकेगा, जिससे पीड़ित की रकम बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही, लोगों को एफआईआर दर्ज कराने के लिए थानों के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे, जिससे शिकायत प्रक्रिया अधिक सरल और प्रभावी बनेगी।









