कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने पार्टी के भीतर मतभेदों की चर्चाओं के बीच अपनी स्थिति साफ की है। तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने कहा कि उन्होंने कभी भी संसद में कांग्रेस के आधिकारिक रुख के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया। केरल लिटरेचर फेस्टिवल में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि वैचारिक स्तर पर उनका एकमात्र मतभेद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर था और अपने उस रुख पर उन्हें कोई अफसोस नहीं है।
थरूर ने बताया कि पहलगाम हमले के बाद उन्होंने एक लेखक और विश्लेषक के रूप में अपनी राय रखी थी। उनका मानना था कि आतंकवादी हमलों का जवाब दिया जाना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी व्यापक युद्ध या लंबे टकराव के पक्ष में नहीं थे। उनके अनुसार, कार्रवाई सीमित और केवल आतंकी ठिकानों तक होनी चाहिए, ताकि देश का विकास प्रभावित न हो।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर सोचना चाहिए। थरूर ने यह भी संकेत दिया कि बाद में सरकार ने जिन कदमों को अपनाया, वे उनके सुझावों से मेल खाते थे। कांग्रेस नेतृत्व से दूरी की अटकलों पर उन्होंने सीधे टिप्पणी नहीं की, लेकिन दोहराया कि देश का हित उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।









