पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में विदेशों से कर्ज लेने को लेकर सार्वजनिक रूप से शर्मिंदगी जताई है। उन्होंने कहा कि जब वे और सेना प्रमुख आसिम मुनीर अन्य देशों से वित्तीय सहायता मांगते हैं, तो उन्हें राष्ट्रीय आत्मसम्मान पर ठेस लगती है। शरीफ ने स्वीकार किया कि यह स्थिति सिर झुकाने वाली है और इसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता।
शहबाज शरीफ का यह बयान उस समय आया है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से ऋण भुगतान में राहत की मांग कर रहा है। उन्होंने चीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर का धन्यवाद करते हुए कहा कि इन देशों ने हर परिस्थिति में पाकिस्तान का समर्थन किया है।
पाकिस्तान की आर्थिक निर्भरता इन देशों पर काफी बढ़ गई है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) के तहत 60 अरब डॉलर से अधिक का निवेश ऊर्जा और बुनियादी ढांचे में हुआ है। सऊदी अरब ने स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान में 3 अरब डॉलर जमा किए और तेल भुगतान सुविधा के रूप में 1.2 अरब डॉलर उपलब्ध कराए। इन देशों का निवेश पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार और भुगतान संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहा है। शरीफ के बयान से पाकिस्तान की बढ़ती वित्तीय निर्भरता और देश के सामने खड़े आर्थिक संकट की स्थिति स्पष्ट होती है।









