दिल्ली में सिंधी समाज के एक बड़े कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सिंध को लेकर बेहद महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि भले ही आज भौगोलिक रूप से सिंध भारत में शामिल न हो, लेकिन सभ्यता और सांस्कृतिक दृष्टि से सिंध हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है। राजनाथ सिंह ने कहा, “दुनिया में सीमाएँ बदलती रहती हैं… कौन जानता है, आने वाले समय में सिंध फिर भारत का हिस्सा बन जाए।”
अपने संबोधन में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का भी जिक्र किया और बताया कि आडवाणी ने अपनी किताब में लिखा है कि कई सिंधी हिंदू आज भी सिंध को भारत से अलग नहीं मानते। राजनाथ ने दावा किया कि रामायण में भी सिंध को राजा दशरथ के राज्य का हिस्सा बताया गया है और यह वही भूमि है जहाँ वेद ज्ञान की उत्पत्ति मानी जाती है।
उन्होंने सिंधी समाज की मेहनत, प्रतिभा और सांस्कृतिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि सिंधी भाषा, साहित्य और कला भारत की साझा विरासत को समृद्ध करते हैं। राजनाथ सिंह ने सीएए का भी उल्लेख किया और बताया कि धार्मिक उत्पीड़न झेलकर आए अल्पसंख्यकों को भारत में सम्मानजनक जीवन देने की प्रतिबद्धता सरकार ने निभाई है। अंत में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का कथन दोहराया—“सिंधी में भारत की आत्मा बोलती है।”









