पंजाब की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब कांग्रेस नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Pratap Singh Bajwa की एक कथित जातिसूचक टिप्पणी को लेकर आम आदमी पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया। सत्तारूढ़ Aam Aadmi Party (आप) ने इसे दलित समाज और मेहनतकश वर्ग के सम्मान पर सीधा प्रहार बताते हुए पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। पार्टी कार्यकर्ताओं, विधायकों और मंत्रियों ने कई जिलों में रैलियां और धरने आयोजित किए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल न केवल असंवेदनशील है, बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी हानिकारक है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से स्पष्ट रुख अपनाने और सार्वजनिक माफी की मांग की।
विवाद की पृष्ठभूमि में कैबिनेट मंत्री Harbhajan Singh ETO का नाम भी सामने आया, जिनके संदर्भ में कथित टिप्पणी की गई थी। ‘आप’ नेताओं का कहना है कि यह मुद्दा किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उन समुदायों की गरिमा से जुड़ा है जो मेहनत-मजदूरी और पारंपरिक पेशों से अपना जीवनयापन करते हैं। पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान सामाजिक बराबरी की भावना के विपरीत हैं। उनका कहना है कि पंजाब ने हमेशा समानता और भाईचारे की संस्कृति को अपनाया है, इसलिए किसी भी प्रकार की जातिगत टिप्पणी को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
राज्य के कई शहरों—जिनमें अमृतसर, लुधियाना, पटियाला और रूपनगर शामिल हैं—में कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकाले। जगह-जगह नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कांग्रेस नेतृत्व इस मामले में स्पष्ट स्पष्टीकरण दे और संबंधित नेता बिना शर्त माफी मांगे। आप नेताओं ने यह भी कहा कि जब तक माफी नहीं दी जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका दावा है कि सामाजिक न्याय और सम्मान की रक्षा के लिए वे हर स्तर पर आवाज उठाते रहेंगे। वहीं कांग्रेस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है, जिससे इस सियासी टकराव की दिशा आगे तय होगी।









