National

उत्तर भारत की जेलों में खालिस्तानी नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा, Pannu Network पर जांच तेज

उत्तर भारत की जेलों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने एक गंभीर खतरे की ओर ध्यान दिलाया है। एजेंसियों के अनुसार, कुछ खालिस्तान समर्थक संगठन जेलों में बंद कैदियों को अपने नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हाल में गिरफ्तार किए गए आरोपी प्रीतपाल सिंह से पूछताछ के दौरान कथित तौर पर ऐसी जानकारी सामने आई है, जिससे जेल के भीतर संपर्क स्थापित कर कैदियों को प्रभावित करने की आशंका मजबूत हुई है। जांच के मुताबिक, प्रीतपाल सिंह को जेल में सजा काटने के दौरान खालिस्तान समर्थक गतिविधियों से जुड़े लोगों ने अपने प्रभाव में लिया। इसी दौरान उसे विदेश में मौजूद खालिस्तान समर्थक अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू से संपर्क का माध्यम उपलब्ध कराया गया। जेल से रिहा होने के बाद उसने कथित तौर पर पन्नू से संपर्क किया और आगे की गतिविधियों के लिए धन भी हासिल किया।

आरोप है कि प्रीतपाल सिंह और उसके साथियों ने दिल्ली तथा पंजाब में खालिस्तान समर्थक और ब्रिक्स विरोधी नारे लिखे, उनके वीडियो बनाए और उन्हें विदेश स्थित संचालकों तक पहुंचाया। एजेंसियां अब उसके डिजिटल संपर्कों, वित्तीय लेनदेन और जेल के दौरान बने संबंधों की जांच कर रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आर्थिक रूप से कमजोर, कानूनी सहायता से वंचित या छोटे अपराधों में जेल पहुंचे कैदी ऐसे नेटवर्क के निशाने पर हो सकते हैं। उन्हें आर्थिक मदद और अन्य प्रलोभनों के जरिए प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है।

जांच में सीमा पार से हथियार और धन पहुंचाने के लिए गुप्त स्थानों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। इस तरह की व्यवस्था में स्थानीय लोगों को सुरक्षित डिजिटल माध्यमों से सामान की जानकारी दी जाती है, जिससे संचालकों और स्थानीय सदस्यों के बीच सीधा संपर्क कम रहता है। 2016 की नाभा जेल फरारी के बाद एक बार फिर जेलों की सुरक्षा और कट्टरपंथी नेटवर्क पर निगरानी का मुद्दा सामने आया है। ‘प्रहार’ अभियान के तहत भर्ती, फंडिंग, हथियार और डिजिटल संपर्कों समेत पूरे आतंकी नेटवर्क पर कार्रवाई पर जोर दिया गया है। ऐसे में निगरानी के साथ कैदियों के लिए परामर्श और सुधारात्मक कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।