दिल्ली में कमर्शियल LPG सिलेंडर लेने के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब व्यापारियों को सिलेंडर लेने से पहले पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) फॉर्म भरना अनिवार्य होगा। इस नई प्रक्रिया के कारण होटल, ढाबा और छोटे व्यवसायों पर असर पड़ा है, और सिलेंडर बुकिंग में गिरावट देखी जा रही है।
सरकार का कहना है कि यह कदम सिस्टम में पारदर्शिता लाने और PNG के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। अब गैस एजेंसियां बिना PNG फॉर्म के कमर्शियल सिलेंडर नहीं देंगी। इससे पहले आसानी से मिलने वाले सिलेंडर अब केवल कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही उपलब्ध होंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव धीरे-धीरे LPG पर निर्भरता कम करने और शहरों में PNG नेटवर्क को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। PNG को सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर माना जाता है। जैसे-जैसे पाइप्ड गैस नेटवर्क बढ़ेगा, वैसे-वैसे LPG की खपत में कमी आने की संभावना है, जिससे सप्लाई पर दबाव और प्रदूषण दोनों कम हो सकते हैं।
दिल्ली में नए नियमों के लागू होने के बाद कमर्शियल सिलेंडर बुकिंग में लगभग 30 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। छोटे दुकानदार, ढाबा और रेस्तरां संचालक परेशान हैं, क्योंकि PNG कनेक्शन हर जगह उपलब्ध नहीं है और नई प्रक्रिया समय लेने वाली है। इससे उनके कामकाज में देरी और अतिरिक्त खर्च हो रहा है।
नई व्यवस्था लागू होते ही कई शहरों में गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर लंबी लाइनें देखने को मिलीं। दस्तावेज जमा करने और फॉर्म भरने में ग्राहकों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ इलाकों में LPG सप्लाई सीधे उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रही और आधी मात्रा गोदामों में अटक रही है। सरकार का यह कदम भविष्य को देखते हुए लिया गया है, लेकिन जमीन पर इसे लागू करने में कई चुनौतियां हैं। अब देखना होगा कि यह बदलाव व्यापारियों के लिए राहत लाता है या परेशानी बढ़ाता है।









