सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और RJD प्रमुख Lalu Prasad Yadav की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने ‘लैंड फॉर जॉब्स’ घोटाले में CBI द्वारा की जा रही जांच को रद्द करने की मांग की थी। हालांकि अदालत ने राहत देते हुए कहा कि वे ट्रायल के दौरान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A से जुड़े कानूनी सवाल उठा सकते हैं।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा कि इस स्तर पर हस्तक्षेप उचित नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी तथ्यात्मक और कानूनी आपत्तियां ट्रायल कोर्ट के समक्ष उठाई जाएं। अदालत ने यह भी कहा कि मामला मेरिट के आधार पर आगे बढ़ेगा और 17A जैसे मुद्दों पर अंतिम निर्णय निचली अदालत में ही लिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि बिना पूर्व अनुमति जांच अवैध है क्योंकि आरोप रेल मंत्री के आधिकारिक कार्यों से जुड़े हैं। वहीं एसवी राजू ने कहा कि 17A का लाभ लागू नहीं होता क्योंकि कथित लेनदेन निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था और याचिका काफी देर से दाखिल की गई।
यह मामला 2004-09 रेलवे भर्ती घोटाले से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि नौकरी के बदले जमीन ली गई। इस केस में Rabri Devi, Tejashwi Yadav और Misa Bharati सहित 41 लोगों पर आरोप तय हो चुके हैं। दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही 17A के पूर्वव्यापी लागू होने को सीमित बताते हुए राहत देने से इनकार कर चुका है।









