खाड़ी क्षेत्र में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, जो 8 अप्रैल के नाजुक युद्धविराम के बाद पहली बड़ी सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है। इस हमले ने क्षेत्र में फिर से टकराव की आशंका बढ़ा दी है। एहतियात के तौर पर UAE सरकार ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों को अस्थायी रूप से ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित कर दिया है।
UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने 12 बैलिस्टिक मिसाइल, तीन क्रूज मिसाइल और चार ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। बावजूद इसके, कुछ मलबा फुजैराह पेट्रोलियम इंडस्ट्रीज ज़ोन में गिरा, जिससे भीषण आग लग गई। इस घटना में तीन भारतीय नागरिक हल्के रूप से घायल हुए हैं। तनाव की जड़ होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते टकराव में है, जो लंबे समय से रणनीतिक महत्व का केंद्र रहा है। अमेरिकी सेना द्वारा इस मार्ग को खोलने की कोशिश के दौरान ईरानी नौकाओं से झड़प हुई, जिसमें कई नावें डुबो दी गईं। साथ ही UAE की तेल कंपनी ADNOC के टैंकर पर भी ड्रोन हमला हुआ।
दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। UAE ने इसे संप्रभुता पर हमला बताते हुए जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखा है, जबकि ईरान ने आरोपों को खारिज कर अमेरिका की गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया है। इस घटना के बाद आम नागरिकों में डर और असंतोष बढ़ा है। मोबाइल अलर्ट जारी किए गए और सार्वजनिक सुरक्षा बढ़ा दी गई। विशेषज्ञ मानते हैं कि परमाणु कार्यक्रम और समुद्री नियंत्रण को लेकर विवाद ही इस संघर्ष की जड़ हैं। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे अमेरिका और ईरान क्या कदम उठाते हैं।









