चांद की ओर बढ़ रहा आर्टेमिस II मिशन इतिहास रचने के बेहद करीब पहुंच गया है। करीब 53 साल बाद यह मिशन इंसानों को फिर से चांद के पास ले जा रहा है, जिससे वैज्ञानिक जगत की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जो चांद के उस हिस्से की तस्वीरें लेंगे जिसे पृथ्वी से नहीं देखा जा सकता। यह मिशन नासा के अपोलो प्रोग्राम के बाद अंतरिक्ष अन्वेषण की दिशा में अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।
अंतरिक्ष यात्री विक्टर ग्लोवर के मुताबिक, जैसे-जैसे यान आगे बढ़ रहा है, पृथ्वी छोटी और चांद बड़ा नजर आने लगा है, जो उनके लिए बेहद खास अनुभव है। आर्टेमिस II मिशन एक नया रिकॉर्ड भी बनाने जा रहा है। यह यान करीब 4 लाख किलोमीटर की दूरी तय करेगा, जो अब तक इंसानों द्वारा की गई सबसे लंबी अंतरिक्ष यात्रा होगी। इससे पहले यह रिकॉर्ड अपोलो 13 मिशन के नाम था। इस मिशन की खास बात यह है कि इसमें जेरेमी हैनसेन पहले गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री हैं, जबकि क्रिस्टीना कोच पहली महिला और विक्टर ग्लोवर पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री हैं, जो इस ऐतिहासिक मिशन का हिस्सा बने हैं।
करीब 10 दिनों के इस मिशन के बाद 10 अप्रैल को अंतरिक्ष यान प्रशांत महासागर में लैंड कर पृथ्वी पर लौटेगा। नासा का यह मिशन भविष्य में चांद पर स्थायी बेस बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिसमें 2028 तक चांद के दक्षिणी ध्रुव पर इंसानों की लैंडिंग का लक्ष्य रखा गया है। नासा की टीम स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।









