कैंसर के इलाज में आमतौर पर सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अब एक नई तकनीक हिस्टोट्रिप्सी बिना सर्जरी के ट्यूमर को खत्म करने में मदद कर रही है। इस प्रक्रिया में अल्ट्रासाउंड की मदद से ट्यूमर को लक्ष्य बनाकर हाई-इंटेंसिटी साउंड वेव्स भेजी जाती हैं, जिससे ट्यूमर धीरे-धीरे टूटकर लिक्विड की तरह हो जाता है और शरीर से आसानी से बाहर निकल जाता है। साल 2023 में अमेरिकी FDA ने इसे लिवर ट्यूमर के इलाज के लिए मंजूरी दी थी। इसके बाद अमेरिका और अन्य देशों में इसका सीमित उपयोग शुरू हो गया है।
खास बात यह है कि इस तकनीक में न तो चीर-फाड़ होती है और न ही अन्य थैरेपी की जरूरत पड़ती है। हिस्टोट्रिप्सी अभी सभी मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं है। यह मुख्य रूप से लिवर कैंसर के उन मरीजों पर प्रभावी है जिनमें ट्यूमर 4 सेंटीमीटर से छोटा हो। प्रक्रिया के दौरान मरीज को बेहोश किया जाता है और अल्ट्रासाउंड की मदद से ट्यूमर की सटीक लोकेशन पर वेव्स भेजी जाती हैं। शुरुआती रिसर्च से पता चला है कि यह तकनीक सुरक्षित और प्रभावी है, लेकिन इसे बड़े स्तर पर अभी लागू नहीं किया गया है। जिन मरीजों के लिए ऑपरेशन संभव नहीं है, उनके लिए हिस्टोट्रिप्सी एक बेहतर विकल्प बन सकती है।









