प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत इजराइल के मोशाव नेवातिम में 300 से अधिक पौधे लगाकर भारत और इजराइल के बीच पर्यावरणीय और सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती दी गई। यह वृक्षारोपण कार्यक्रम इजराइल के पारंपरिक पर्व ‘तू बिश्वात’ (Tu BiShvat) के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का आयोजन इजराइल स्थित भारतीय दूतावास ने गैर-लाभकारी संस्था केरेन कायमेट लेइजराइल और कृषि आधारित बस्ती मोशाव नेवातिम के सहयोग से किया। यह पहल पर्यावरणीय स्थिरता, सामुदायिक भागीदारी और दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत रिश्तों का प्रतीक मानी जा रही है। इस मौके पर इजराइल के पर्यावरण संरक्षण मंत्रालय के महानिदेशक रामी रोजेन, भारत के राजदूत जेपी सिंह और बनेई शिमोन क्षेत्रीय परिषद के प्रमुख निर ज़मीर समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में भारत-इजराइल सहयोग को और गहरा करने पर जोर दिया।
राजदूत जेपी सिंह ने कहा कि ‘तू बिश्वात’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहलें प्रकृति और सामुदायिक जीवन को जोड़ती हैं तथा दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि लगाए गए पौधे भारत-इजराइल मित्रता के स्थायी प्रतीक बनेंगे और आने वाली पीढ़ियों तक इस रिश्ते को मजबूत करेंगे।
रामी रोजेन ने भी दोनों देशों के बीच जलवायु और पर्यावरण के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति की रक्षा करना जीवन की सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गौरतलब है कि मोशाव नेवातिम की स्थापना कोच्चि से आए भारतीय यहूदियों ने की थी। यहां आज भी उनकी विरासत जीवित है, जिसमें पारंपरिक कोचीन शैली का आराधनालय और भारत यहूदी विरासत केंद्र शामिल है। इस तरह यह आयोजन न केवल पर्यावरण संरक्षण, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव का भी प्रतीक बन गया।









