प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने NHAI टोल प्लाजा पर कथित फर्जी टोल वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में बुधवार, 2 सितंबर को बड़ी कार्रवाई की। ED की लखनऊ जोनल टीम ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक साथ 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
जांच एजेंसी को संदेह है कि कुछ टोल प्लाजा पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर के जरिए फर्जी टोल रसीदें तैयार की जा रही थीं। आरोप है कि टोल से प्राप्त रकम का एक हिस्सा NHAI के आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम में दर्ज किए बिना दूसरी जगह डायवर्ट किया गया, जिससे सरकारी राजस्व को बड़ा नुकसान हुआ।
फॉरेंसिक जांच और NHAI के रिकॉर्ड में कथित तौर पर ऐसे सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं। ED की टीमें छापेमारी के दौरान डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज, बैंक खातों और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। जांच का मुख्य फोकस कथित मनी ट्रेल और रकम के अंतिम लाभार्थियों की पहचान पर है।
इस मामले में वाराणसी से कथित मास्टरमाइंड आलोक सिंह की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। जांच एजेंसियां देशभर के 200 से अधिक टोल प्लाजा की जांच कर रही हैं, जिनमें करीब 100 प्लाजा उत्तर प्रदेश में बताए जा रहे हैं।


