विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिका के साथ टैरिफ को लेकर जारी मतभेदों पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि कुछ मुद्दे जरूर हैं, लेकिन उन्हें इस स्तर तक नहीं ले जाना चाहिए कि बाकी द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़े. उन्होंने कहा कि बातचीत और समझदारी से इन समस्याओं का समाधान संभव है.
नई दिल्ली में चौथे कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. जयशंकर ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, विनिर्माण, डेटा और संसाधनों से जुड़े रणनीतिक बदलावों पर भारत के दृष्टिकोण को साझा किया. उन्होंने बताया कि भारत विश्व स्तर पर हो रहे आर्थिक व भू-राजनीतिक परिवर्तनों के अनुरूप अपनी नीतियां बना रहा है. रूस से तेल खरीद पर अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क को अनुचित बताते हुए उन्होंने कहा कि यह दोहरापन है क्योंकि अन्य देश भी ऐसा कर रहे हैं, लेकिन सिर्फ भारत पर सवाल उठाए जा रहे हैं.
क्वाड समूह को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए उन्होंने कहा कि यह अब भी पूरी तरह सक्रिय है और इस वर्ष दो बार विदेश मंत्रियों की बैठक हो चुकी है. अगली बैठक भारत में होनी है. भारत के एफटीए प्रयासों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत उन साझेदारों के साथ समझौते चाहता है जो आर्थिक रूप से टिकाऊ और भरोसेमंद हों. ब्रिटेन के साथ चल रही बातचीत से भारत संतुष्ट है, वहीं यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ भी समझ बनाने की कोशिश जारी है.









