भारत और अमेरिका के बीच लंबी बातचीत के बाद व्यापारिक समझौता अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। हाल ही में कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि 500 फीसदी तक टैरिफ की आशंका के बावजूद दोनों देशों के बीच समझौता लगभग तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि घोषणा केवल तभी होगी जब दोनों पक्ष पूरी तरह सहमत और तैयार होंगे।
अग्रवाल ने यह जानकारी दी कि हाल ही में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि (USTR) के बीच वर्चुअल बैठक हुई। बैठक में चर्चा सकारात्मक रही और डील के लिए अंतिम चरण में काम चल रहा है। हालांकि, अभी कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है।
डाटा के मुताबिक, अमेरिका में भारतीय सामान की मांग लगातार बढ़ रही है। उच्च टैरिफ और व्यापारिक दबाव के बावजूद भारत हर महीने अमेरिका को लगभग 7 बिलियन डॉलर का सामान निर्यात कर रहा है। टेक्सटाइल, सी-फूड और रत्न-आभूषण जैसे सेक्टरों ने अपनी निरंतर ग्रोथ बनाए रखी है। फार्मा सेक्टर ने भी विविधता की रणनीति अपनाई है और अब ब्राजील, नाइजीरिया जैसे उभरते बाजारों में अपने उत्पाद पहुंचा रहा है।
सरकार का कहना है कि यह रणनीति भारतीय कंपनियों को किसी एक बाजार पर निर्भर रहने से बचाती है। अगर एक बाजार में चुनौतियां आती हैं, तो अन्य विकल्प मौजूद हैं। इस तरह, अमेरिकी टैरिफ के दबाव के बावजूद भारतीय निर्यातकों ने नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। इस समझौते के साथ भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों में नया आयाम जुड़ने वाला है, जिससे दोनों देशों के लिए निर्यात और निवेश के अवसर बढ़ेंगे।









