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दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद: हाईकोर्ट में केंद्र का पक्ष, लीज खत्म होने के बाद परिसर पर क्लब का अधिकार नहीं

दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ जमीन को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में स्पष्ट किया कि क्लब की स्थायी लीज कानूनी प्रक्रिया के तहत समाप्त की जा चुकी है और अब क्लब का परिसर पर कोई वैधानिक अधिकार नहीं बचा है। सरकार ने कहा कि एस्टेट ऑफिसर द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पूरी तरह कानून के अनुरूप है और सार्वजनिक परिसरों से बेदखली की प्रक्रिया को अदालत द्वारा रोका नहीं जा सकता।

केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि Public Premises (Eviction of Unauthorised Occupants) Act के तहत बेदखली से जुड़े मामलों के लिए अलग वैधानिक व्यवस्था मौजूद है। ऐसे मामलों में एस्टेट ऑफिसर सक्षम प्राधिकारी हैं और प्रभावित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। सरकार का तर्क है कि इस प्रक्रिया में न्यायिक हस्तक्षेप सीमित है और कानून किसी प्रकार के स्थगन आदेश की अनुमति नहीं देता।

मामले की सुनवाई जस्टिस अवनीश झिंगन की अदालत में हुई, जहां क्लब सदस्य विजय खुराना और क्लब कर्मचारियों की ओर से दायर याचिकाओं पर विचार किया गया। याचिकाकर्ताओं ने एस्टेट ऑफिसर की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की, जबकि उनके वरिष्ठ वकील ने केंद्र के जवाब पर प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। अदालत ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 3 सितंबर तय कर दी।

सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि 28 फरवरी 1928 की लीज की शर्तों के अनुसार 22 मई 2026 को इसे समाप्त किया गया था। यह भूमि अधिग्रहण का मामला नहीं, बल्कि लीज समझौते में निहित संविदात्मक अधिकारों का प्रयोग है। दूसरी ओर, विजय खुराना का आरोप है कि सरकार ने रक्षा अवसंरचना की जरूरत का पर्याप्त आधार नहीं बताया और बेदखली की कार्रवाई कानूनी रूप से उचित नहीं है। अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तृत बहस होगी।