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₹2,000 से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज का विवाद बढ़ा, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई याचिका

यूपीआई (UPI) के जरिए ₹2,000 से अधिक के कमर्शियल लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने के प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस संबंध में एडवोकेट अंजन दत्ता की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और UPI से जुड़े पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है।

याचिका में वित्त मंत्रालय की ओर से जारी संबंधित गजट अधिसूचनाओं और MDR फ्रेमवर्क को रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि नई व्यवस्था के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है और यह कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकती है। याचिका में व्यवस्था को मनमाना और भेदभावपूर्ण बताते हुए इसके संवैधानिक आधार पर भी सवाल उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि शुल्क भले ही मामूली हो और डिजिटल पेमेंट सिस्टम के संचालन के लिए जरूरी बताया जाए, लेकिन इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों और आम जनता पर पड़ सकता है।इस बीच, UPI पर MDR को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार से प्रस्तावित शुल्क वापस लेने की मांग की है। वहीं, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR को लेकर चिंता जताई है।