कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के बाद राजनीतिक हलकों में बैठने की व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उसके वरिष्ठ नेताओं—लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे—को अपेक्षाकृत पीछे की पंक्तियों में बैठाकर विपक्ष के पद और गरिमा की अनदेखी की गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह केवल सीटों का सवाल नहीं, बल्कि परंपरा, प्रोटोकॉल और लोकतांत्रिक मर्यादाओं से जुड़ा विषय है। पार्टी के कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर पुराने कार्यक्रमों की तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि पूर्व सरकारों के दौरान विपक्ष के प्रमुख नेताओं को हमेशा अग्रिम पंक्तियों में स्थान दिया जाता रहा है, चाहे सत्ता किसी के भी हाथ में रही हो।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करके लिखा कि पहले गणतंत्र दिवस समारोह में वरिष्ठ विपक्षी नेताओं को पहली पंक्ति में सम्मानपूर्वक बैठाया जाता था, लेकिन इस बार तस्वीर अलग नजर आई। उन्होंने इसे एक गलत संदेश देने वाला कदम बताया। सांसद मणिकम टैगोर ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया देते हुए सवाल किया कि क्या अब प्रोटोकॉल बदल दिया गया है या फिर यह जानबूझकर किया गया फैसला है।
वरिष्ठ नेता विवेक तन्खा ने टिप्पणी की कि राष्ट्रीय पर्व पर इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक शिष्टाचार के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार, ऐसे अवसरों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी संवैधानिक पदों का सम्मान होना चाहिए। वहीं, रणदीप सुरजेवाला ने इसे सरकार की “संकीर्ण सोच” करार देते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन विपक्ष के नेता के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं हो सकता।
कांग्रेस ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं मानती, बल्कि इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और परंपराओं से जोड़कर देख रही है। पार्टी का कहना है कि गणतंत्र दिवस जैसे अवसर पर समावेशिता और सम्मान का संदेश जाना चाहिए, न कि टकराव का।









