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जन्म प्रमाण पत्र होगा अब सबसे जरूरी दस्तावेज, जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम होंगे और सख्त

केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़े कानून में संशोधन के लिए जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को विपक्ष के हंगामे के बीच यह विधेयक सदन में रखा।

इस विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में बदलाव करना है, ताकि देर से होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को और सख्त बनाया जा सके। वर्तमान नियमों के अनुसार, यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक साल से अधिक समय बाद कराया जाता है तो जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी होती है। नए प्रावधानों में देरी की अवधि के आधार पर अलग-अलग स्तर की मंजूरी व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है।

सरकार का कहना है कि जन्म प्रमाण पत्र को भविष्य में नागरिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बनाया जाएगा। इसका उपयोग स्कूल-कॉलेज में प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस, सरकारी सेवाओं में आवेदन सहित कई जरूरी कार्यों में किया जा सकेगा।

नई व्यवस्था से नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। ऑनलाइन माध्यम से प्रमाण पत्र प्राप्त करने और डाउनलोड करने की सुविधा बढ़ने से प्रक्रिया आसान होगी। सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, समय की बचत होगी और अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी।