ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने अपनी सैन्य ताकत और सटीक हमले करने की क्षमता का प्रदर्शन किया। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने रविवार, 25 अक्टूबर को कहा कि पश्चिमी मोर्चे पर 1,200 किलोमीटर की चौड़ाई और 200 किलोमीटर की गहराई तक किए गए हमलों ने साबित किया कि भारतीय वायुसेना की पहुंच से कोई भी लक्ष्य बाहर नहीं है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने वायु शक्ति को देश की प्राथमिक जवाबी क्षमता और रणनीतिक प्रतिरोध के मजबूत साधन के रूप में स्थापित किया है। इस अभियान ने भारतीय वायुसेना की क्षमता-केंद्रित रणनीति को भी वास्तविक परिस्थितियों में परखने का अवसर दिया।
स्वदेशी हथियारों ने दिखाया दम
एयर चीफ मार्शल के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान भारत में विकसित कई हथियार प्रणालियों ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग सैन्य प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न क्षमताओं का एकीकृत इस्तेमाल करने से जरूरत के मुताबिक जवाब देना और तनाव को नियंत्रित रखना संभव हुआ। मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किए गए इस अभियान में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। सिंह ने कहा कि इस ऑपरेशन से भारत की सैन्य रणनीति को मजबूती मिली है और भविष्य में भी इसी दिशा में काम जारी रहेगा।
एयर डिफेंस और आधुनिक तकनीक पर जोर
IAF प्रमुख ने बताया कि भारत की स्वदेशी नेटवर्क आधारित वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी सेना की ओर से भेजे गए कई ड्रोन और दूर से हमला करने वाले हथियारों को निष्क्रिय करने में अहम भूमिका निभाई। आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं के तालमेल ने अभियान को प्रभावी बनाया। उन्होंने भविष्य की तैयारियों पर जोर देते हुए कहा कि वायुसेना को खुफिया निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन-रोधी प्रणालियों, मजबूत नेटवर्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निर्णय प्रणाली को और बेहतर बनाना होगा। इसके अलावा, लंबे समय तक सैन्य अभियान चलाने के लिए लॉजिस्टिक्स, रखरखाव, बुनियादी ढांचे और स्वदेशी उत्पादन को मजबूत करना भी जरूरी है।


