मद्रास हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को तमिलनाडु में विजयादशमी के अवसर पर रूट मार्च और जनसभाएं आयोजित करने की अनुमति देने का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने पुलिस के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए मार्च की अनुमति देने से इनकार किया गया था। कोर्ट के इस फैसले से राज्य में 25 अक्टूबर और 1 नवंबर, 2026 को 128 स्थानों पर रूट मार्च आयोजित करने का रास्ता खुल गया है।
न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने RSS के राज्य सचिव वी. जगदीसन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन.एल. राजा ने पक्ष रखा। याचिका में पुलिस द्वारा अनुमति देने से इनकार करने के फैसले को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति ने कहा कि सार्वजनिक सड़कें सभी नागरिकों के लिए हैं और निर्धारित नियमों का पालन करते हुए वहां कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी जानी चाहिए। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि पुलिस बार-बार उन्हीं आधारों पर अनुमति देने से इनकार कर रही है, जिन्हें पहले भी न्यायिक स्तर पर खारिज किया जा चुका है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने RSS को राहत देने के साथ कुछ शर्तें भी स्पष्ट की हैं। संगठन को वर्ष 2025 में निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। यदि मार्च या जनसभाओं के दौरान किसी नियम का उल्लंघन होता है, तो पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है। गौरतलब है कि RSS ने पहले 18 अक्टूबर, 25 अक्टूबर और 1 नवंबर को रूट मार्च निकालने की अनुमति मांगी थी। पुलिस ने प्रस्तावित मार्गों पर दूसरे समुदायों के धार्मिक स्थल, तर्कवादी नेताओं की प्रतिमाएं और यातायात बाधित होने की आशंका का हवाला देते हुए आवेदन खारिज कर दिए थे। इसके बाद संगठन ने हाईकोर्ट का रुख किया। अदालत के ताजा फैसले को RSS के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।


