केंद्र सरकार ने जनगणना प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव किया है। गृह मंत्रालय ने जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित कर जनगणना करने वाले एन्यूमेरेटर की पात्रता का दायरा बढ़ा दिया है। नए नियमों के तहत अब सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, सरकारी अधिकारी, क्लर्क और विभिन्न संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारी भी जनगणना कार्य के लिए नियुक्त किए जा सकेंगे।
संशोधित नियमों के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों के कर्मचारियों के अलावा स्थानीय निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU), वैधानिक निकायों और अन्य संस्थानों में कार्यरत लोगों को भी एन्यूमेरेटर बनने का अवसर मिलेगा। इसमें बैंकों, कंपनियों, सोसायटियों और ट्रस्टों में काम करने वाले अधिकारी एवं क्लर्क भी शामिल हैं। यह प्रावधान सरकारी, सहायता प्राप्त और बिना सहायता वाले निजी शिक्षण संस्थानों पर भी लागू होगा।
सरकार ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को किसी अन्य उपयुक्त व्यक्ति को जनगणना एन्यूमेरेटर नियुक्त करने का विकल्प भी दिया है। इससे जरूरत के अनुसार जनगणना कार्य के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। गृह मंत्रालय ने ये संशोधन जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 18(1) के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए अधिसूचित किए हैं। आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन के साथ ये नियम लागू हो गए हैं। अधिसूचना भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी की गई।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य जनगणना कार्य के लिए पात्र लोगों का दायरा बढ़ाना और कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के विकल्पों का विस्तार करना है। इससे जनगणना संबंधी जिम्मेदारियों के लिए विभिन्न क्षेत्रों के कर्मचारियों की सेवाएं लेने का रास्ता खुलेगा।


