पंजाब मंडी बोर्ड में करीब 500 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा पहले बनाई जा चुकी सड़कों के निर्माण के लिए मंडी बोर्ड ने दोबारा टेंडर जारी किए और कथित तौर पर भुगतान भी किया। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार सहित अन्य प्रतिवादी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
दस मार्केट कमेटियों के हस्तांतरण पर उठे सवाल
गुरदासपुर निवासी रणजीत सिंह ने याचिका में आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों पर दस मार्केट कमेटियों के कार्य पंजाब मंडी बोर्ड को सौंप दिए गए। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस फैसले से पहले आवश्यक मंजूरी, तकनीकी मूल्यांकन और वित्तीय औचित्य की जांच किए जाने पर सवाल उठते हैं। याचिका में बताया गया है कि 15 मार्च 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में PWD और मंडी बोर्ड के बीच ग्रामीण संपर्क सड़कों के निर्माण कार्यों के बंटवारे पर चर्चा हुई थी। उस समय मार्केट कमेटियों के आधार पर पहले से लागू व्यवस्था जारी रखने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, याचिकाकर्ता का दावा है कि सितंबर 2026 में इस व्यवस्था में बदलाव किया गया। 9 सितंबर को मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद 16 और 21 सितंबर के कार्यालय आदेशों के जरिए काहनूवान और कलानौर समेत दस मार्केट कमेटियों के कार्य मंडी बोर्ड को सौंपे गए।
इंजीनियर इन चीफ की भूमिका की जांच की मांग
याचिका में मंडी बोर्ड के इंजीनियर इन चीफ जतिंदर भंगू की भूमिका की जांच करने की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि पहले निर्मित सड़कों के लिए दोबारा टेंडर और भुगतान किए जाने से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने की आशंका है। इसी आधार पर करीब 500 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और जांच पूरी होने तक संबंधित कार्यों के नए टेंडर तथा भुगतान पर रोक लगाने का आग्रह किया है। फिलहाल ये सभी आरोप याचिका में लगाए गए हैं। मामले में प्रतिवादी पक्षों का जवाब और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।


