आमतौर पर मुंबई और दिल्ली को देश के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों के तौर पर देखा जाता है, लेकिन एक नई रिपोर्ट ने तस्वीर का दूसरा पहलू सामने रखा है। प्रति परिवार औसत खर्च के मामले में छोटे और मझोले शहर कई बड़े महानगरों से आगे निकल रहे हैं। ‘द मेनी अर्बन इंडियाज’ रिपोर्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ देश में औसत घरेलू खपत के मामले में पहले स्थान पर है। इसके बाद तिरुवनंतपुरम का नंबर आता है। खास बात यह है कि अमृतसर, अहमदाबाद और जबलपुर जैसे शहरों में भी प्रति परिवार औसत खर्च मुंबई से ज्यादा दर्ज किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ में एक परिवार की औसत सालाना आय करीब 28.3 लाख रुपये है। यहां घरेलू खर्च भी देश के अधिकांश शहरों की तुलना में काफी अधिक है, जिसके चलते चंडीगढ़ खपत के मामले में शीर्ष पर पहुंच गया है। हालांकि, औसत घरेलू खर्च में पीछे रहने के बावजूद मुंबई और दिल्ली की कुल उपभोक्ता ताकत कम नहीं हुई है। इसकी बड़ी वजह इन शहरों में रहने वाले परिवारों की बड़ी संख्या है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई में एक परिवार की औसत सालाना आय करीब 24.2 लाख रुपये है और औसत खर्च लगभग 14 लाख रुपये सालाना है।
दिल्ली-एनसीआर में करीब 75 लाख, जबकि मुंबई में लगभग 46-47 लाख परिवार हैं। यही बड़ा उपभोक्ता आधार दोनों महानगरों को कुल खर्च के लिहाज से देश के सबसे बड़े बाजारों में बनाए रखता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के शीर्ष 100 शहर मिलकर करीब 844 अरब डॉलर का सालाना उपभोक्ता बाजार तैयार करते हैं। देश की कुल आबादी में इन शहरों की हिस्सेदारी करीब 19 फीसदी है, लेकिन आय और खपत में उनका योगदान काफी ज्यादा है। रिपोर्ट के आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत की शहरी अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव हो रहा है। अब खपत की रफ्तार सिर्फ मुंबई, दिल्ली जैसे बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे और तेजी से विकसित हो रहे शहर भी देश के प्रमुख उपभोक्ता बाजारों के रूप में तेजी से उभर रहे हैं।


