जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामले में ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को नोटिस जारी किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सवाल उठाया कि जब अदालत ने छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की जबरदस्ती की कार्रवाई नहीं करने का स्पष्ट आदेश दिया था, तो फिर कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने नोटिस कैसे जारी कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि ग्रेटर नोएडा में दूसरे वर्ष में पढ़ने वाले एक छात्र को नोएडा पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस भेजा गया था। यह नोटिस गौतम बुद्ध नगर प्रशासन के माध्यम से छात्र को तामील कराया जाना था। हालांकि, बाद में प्रशासन ने नोटिस वापस ले लिया।
इस मामले पर CJI सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश पूरी तरह स्पष्ट था और उसका पालन करना प्रत्येक मजिस्ट्रेट के लिए अनिवार्य है। उन्होंने टिप्पणी की कि कोई भी मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी संकेत दिया कि संबंधित मजिस्ट्रेट से इस पूरे घटनाक्रम को लेकर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर को छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए छात्रों के खिलाफ कठोर या जबरदस्ती की कार्रवाई पर रोक लगाई थी। यह मामला 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में हुए छात्र प्रदर्शनों से संबंधित था। अदालत ने इन प्रदर्शनों से जुड़ी सभी एफआईआर रद्द करने का आदेश भी दिया था। हालांकि, गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल ऐसे लोगों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दिल्ली पुलिस को दी गई थी, जिन पर सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप थे।


