संसद के ऊपरी सदन (राज्यसभा) में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनि मत से पारित कर दिया गया है। लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पास होने के बाद अब ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने को आपराधिक अपराध बनाने वाले इस महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी मिल गई है। चर्चा के दौरान कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने भारी हंगामा किया और सदन से वॉकआउट भी किया, जिसके बावजूद सरकार ने बिल पास करा लिया। विपक्ष के विरोध पर कड़ा रुख अपनाते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ का विरोध करने का मतलब देश के ‘तेरे टुकड़े होंगे गैंग’ का हौसला बढ़ाना है। उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी तुष्टीकरण की राजनीति के सहारे देश के सम्मान का अपमान करने की कोशिश कर रही है और देश की जनता यह सब भली-भांति देख रही है।
नित्यानंद राय ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि यह कोई आम विधेयक नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा, राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक राष्ट्रीयता का प्रतीक है जो हमें स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाता है। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए बताया कि बंकिम चंद्र चटर्जी ने वर्ष 1875 में इस राष्ट्रीय गीत की रचना की थी और यह सपना देखा था कि एक दिन यह हर भारतीय की जुबान पर होगा। हालांकि, उन्होंने वर्ष 1937 में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा ‘वंदे मातरम’ को केवल दो छंदों तक सीमित किए जाने का दुर्भाग्यपूर्ण जिक्र भी किया।
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को गले लगाते और देश के लिए कुर्बान होते वक्त अपने अंतिम शब्दों के रूप में ‘वंदे मातरम’ का ही उच्चारण किया था। ऐसे पावन राष्ट्रीय गीत के अपमान पर सजा का प्रावधान करने वाले इस कानून का विरोध समझ से परे है। अपने संबोधन के अंत में मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वामी विवेकानंद के सपनों को साकार कर रहे हैं, जिन्होंने देश में ‘वंदे मातरम’ को उसका उचित स्थान दिलाने का संकल्प लिया था। सरकार का स्पष्ट मानना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान राजनीति से ऊपर होना चाहिए और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को पूरा करने के लिए ‘वंदे मातरम’ का आदर सर्वोपरि है।


