एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच (NEW) की ताज़ा रिपोर्ट ने देश की राजनीति की एक अहम तस्वीर सामने रखी है। 28 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 31 मुख्यमंत्रियों के चुनावी हलफनामों के विश्लेषण में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, देश के 31 में से 14 मुख्यमंत्री (45%) ऐसे हैं जिन्होंने अपने हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। इनमें से 11 मुख्यमंत्रियों (35%) पर हत्या के प्रयास, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, आपराधिक धमकी और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े मामले दर्ज हैं।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी सबसे अधिक 89 आपराधिक मामलों के साथ सूची में सबसे ऊपर हैं। उनके बाद पश्चिम बंगाल के शुभेंदु अधिकारी (29 मामले), आंध्र प्रदेश के एन. चंद्रबाबू नायडू (19 मामले) और कर्नाटक के डी.के. शिवकुमार (19 मामले) का नाम शामिल है। संपत्ति के मामले में डी.के. शिवकुमार देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं। उनकी घोषित संपत्ति ₹1,413 करोड़ से अधिक है। इसके बाद एन. चंद्रबाबू नायडू (₹931 करोड़), सी. जोसेफ विजय (₹648 करोड़) और पेमा खांडू (₹332 करोड़) का स्थान है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के 4 मुख्यमंत्री अरबपति हैं, जबकि सभी मुख्यमंत्रियों की कुल घोषित संपत्ति करीब ₹3,660 करोड़ है। वहीं, जम्मू-कश्मीर के उमर अब्दुल्ला सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्री हैं। उनकी घोषित संपत्ति केवल ₹55.24 लाख है और उनके नाम कोई अचल संपत्ति नहीं है।
कर्ज के मामले में भी डी.के. शिवकुमार सबसे आगे हैं। उन पर ₹265 करोड़ से अधिक की देनदारी है, जबकि पेमा खांडू पर ₹180 करोड़ और हिमंत बिस्वा सरमा पर करीब ₹16.86 करोड़ का कर्ज दर्ज है। शिक्षा के लिहाज़ से अधिकांश मुख्यमंत्री उच्च शिक्षित हैं। रिपोर्ट के अनुसार 9 पोस्ट ग्रेजुएट, 7 स्नातक, 6 प्रोफेशनल ग्रेजुएट और 3 डॉक्टरेट डिग्रीधारी मुख्यमंत्री हैं। डॉक्टरेट करने वालों में डॉ. मोहन यादव, हिमंत बिस्वा सरमा और सम्राट चौधरी शामिल हैं। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी अब भी बेहद सीमित है। देश के 31 मुख्यमंत्रियों में केवल एक महिला मुख्यमंत्री हैं—दिल्ली की रेखा गुप्ता। यानी 97% मुख्यमंत्री पुरुष और केवल 3% महिलाएं हैं।
उम्र के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक 17 मुख्यमंत्री 51 से 60 वर्ष आयु वर्ग के हैं। इसके अलावा 8 मुख्यमंत्री 41–50 वर्ष, 2 मुख्यमंत्री 61–70 वर्ष और 4 मुख्यमंत्री 71–80 वर्ष आयु वर्ग में आते हैं। ADR और नेशनल इलेक्शन वॉच की यह रिपोर्ट भारतीय राजनीति के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर करती है। एक ओर बड़ी संख्या में मुख्यमंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं और कई नेता अत्यधिक संपन्न हैं, वहीं महिलाओं की भागीदारी बेहद सीमित बनी हुई है। हालांकि शिक्षा के स्तर पर अधिकांश मुख्यमंत्री उच्च शिक्षित हैं, लेकिन राजनीति में आपराधिक मामलों और धनबल की मौजूदगी लोकतांत्रिक व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती के रूप में सामने आती है।


